मैं आम आदमी हूँ
छोटे से घर में रहता हूँ।
सब तकलीफें सहता हूँ।।
आँखें आँसू से भरी होती है
पर किसी से कुछ न कहता हूँ।।
महीने भर मैं काम करता हूँ
बॉस के ताने भी सहता हूँ
बात आये पगार बढाने की
क्या करता तू, ऐसा सुनता हूँ
घर परिवार की बातों को सुनकर
बिटिया की आँखों मे ख्वाब बुनकर
उनकी सब इच्छाएं पूरी करने को
रोज घर से हँसकर निकलता हूँ ।।
माँ की आँखों का तारा बनना
पिता का अपने सहारा बनना
खुशियां मिले सदा परिवार को
ऐसी कोशिश मैं करता रहता हूँ
दोस्तो से मिलता नजरें बचाकर
आँखों मे सारे गम छिपाकर
जब भी जन्मदिन मेरा आता
कोई पार्टी न मांगे इससे डरता हूँ ।।
तूने जन्म दिया है मुझको
हरदम याद करूं मैं तुझको
कभी कटेगा मेरा भी ये गम
बस इसी आस में मैं रहता हूँ
गम मेरे सारे तू दूर भगा दे
इस संसार को सुखी बना दे
आखिर तेरे ही हैं हम बच्चे
हम पर थोड़ी दया दिखा दे।।
Ajay
24-Apr-2022 03:45 PM
शब्द मोती हैं। माला की तरह पिरो दे तो कविता और बिखर कर भी अपनी आभा न खोएं तो कहानी।👋🏻👋🏻👋🏻
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Swati chourasia
20-Apr-2022 04:36 PM
Very beautiful 👌
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Seema Priyadarshini sahay
20-Apr-2022 12:54 AM
बहुत खूबसूरत
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